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शुक्रवार, 25 मार्च 2016

[व्याख्यान] हिंदी भाषा की संस्कृति

1. भाषा एक साथ बहुत कुछ है. 
वह-
संप्रेषण की एक बहुमुखी व्यवस्था है,सोचने-विचारने का माध्यम है,सर्जनात्मक अथवा साहित्यिक अभिव्यक्ति का कलात्मक साधन है,एक सामाजिक संस्था है,
राजनैतिक विवाद का सार्वकालिक मुद्दा है तो
किसी देश को एकता के सूत्र में बांधने और उसके विकास का जरिया भी है.
                                           .[दिलीप सिंह, भाषा का संसार, पृष्ठ 9]

2. भाषा = एक विशिष्ट मानव व्यवहार : संप्रेषण के निमित्त 
संप्रेषण : भाषा का प्रयोग करके क्या करना चाहते हैं/ परपज. क्यों / नीड. प्रसंग/ रेफरेंस, कॉन्टेक्स्ट. मनोदशा /मूड. विषय / थीम, टॉपिक . [हैलिडे]

3.  मनुष्य 
= सामाजिक प्राणी
= बोलने वाला प्राणी
= बातचीत करने वाला प्राणी /होमोलोगन
= लिखने वाला प्राणी

4. .सर्जनात्मक वृत्ति : शैली 
सहवाग ने पांच चौके जड़े / मारे.
धोनी ने रनों की झड़ी लगा दी / ढेर सारे रन बनाए.
मोहन की बात में दम था/ ठीक थी.
वह मुँह बाए देखता रहा / कुछ नहीं समझा.

 5. अर्थ : प्रतीक और बिंब 
अर्थ शक्यता / मीनिंग पोटेंशियल
कमल-पंकज = सौंदर्य/ कोमलता/ शुभ
धुआँ = निराशा/ अनिश्चय
बादल= अनुभूति की सघनता/ वेदना
लालिमा = क्रोध/ लज्जा

6. भाषा : लचीलापन 
संभावनाओं का पुंज
- पारिस्थितिक संदर्भ/ कॉन्टेक्स्ट ऑफ़ सिचुएशन
- सांस्कृतिक संदर्भ / कल्चरल कॉन्टेक्स्ट

7.  पराभाषाविज्ञान / पैरालिंग्विस्टिक्स
         - मुद्रा/आसन :
टेबल पर पैर पसारना [दीवार]/
आगे झुकना/
पीछे टिकना/
कोहनी टेबल पर/
ओंठ बिचकाना/
आँख मिलाना 
- अंगविक्षेप/ जेस्चर :
तेजी से बदलाव : नैनन ही सों बात 
- काकु/ उतार-चढ़ाव :
 फुसफुसाकर/
भर्राई आवाज़/
 जोर से/
 कलपते हुए/
 झल्लाते हुए/
 क्क्क्कक्क्क किरन

8.  भाषा प्रकार्य / फंक्शन्स : हैलिडे
1. साधनपरक INSTRUMENTAL : चाहिए/ चाहता हूँ/ करूँ/ देखूं/ इच्छा है कि...
2. नियंत्रक REGULATORY : देखो, दौड़ो, खाओ, पकड़ो, चलो.
स्वामित्व- दूसरों की चीज़ नहीं छूनी चाहिए.
धमकी – अगर फिर गाली दी तो पीटूंगा.
नियम – सिगरेट पीना मना है.
चेतावनी – घास पर न चलें.
सुझाव- अधिक से अधिक भाषाएँ सीखनी चाहिए
.3. अंतःक्रियात्मक INTERACTIONAL : बातचीत, मज़ाक, हँसी उड़ाना, मनाना, तर्क करना, सहमति-असहमति जताना.
4. व्यक्तिगत PERSONAL : निजता: भाव, विचार, आकांक्षा
5. अन्वेषणात्मक  HEURISTIC : जानना, समझना, प्रश्न-उत्तर
6. कल्पनात्मक IMAGINATIVE : अपनी दुनिया अपना परिवेश – रचना/ कहानी, कविता, अनुमान, प्रतीक
.7. प्रतिनिधानात्मक REPRESENTETIONAL : प्रयोजनमूलक : कार्यालय, विज्ञान, समाचार, विज्ञापन.... 

9.  संस्कृति 
1. मानव के द्वारा सृजन – साहित्य, संगीत, कला, ...
2. भाषा, प्रथा, संस्कार : शिष्टाचार, आचरण, धर्म, सदाचार, मूल्य-व्यवस्था.

 10.  भाषा और संस्कृति
जॉन लायंस : क्योंकि भाषा समाज-संदर्भित होती है, इसलिए भाषा व्यवहार को उस भाषा की विशिष्ट सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में संदर्भित किए बिना स्पष्ट नहीं किया जा सकता . 
लोक संस्कृति : हिंदी/ मणिपुरी/ अरुणाचली/ पंजाबी/ तमिल/ तेलुगु...
धर्म और संस्कृति : हिंदू/ मुस्लिम ....
राष्ट्रीय संस्कृति : भारतीय/ चीनी/ ब्रिटिश......

11.  सर्वनाम प्रयोग
पद, अवस्था और अधिकार का सूचक
आयु और लिंग के अनुसार भी परिवर्तन
परस्पर मेलजोल, घनिष्ठता, भावनात्मक एकता, औपचारिकता का द्योतक
मैं/ हम : रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप होते हैं और नाम है शहंशाह!
तू/ तुम/ आप : पहले जाँ, फिर जाने जाँ, फिर जाने जानाँ हो गए !
 माँ/ भगवान : माँ! तू कहाँ गई थी? /
हे भगवान! अब तू ही रक्षा कर.
 आप : नाराजगी, व्यंग्य
आदरसूचक [ये] : यह/ये/वह/वे/वो  : ये तो घर पर नहीं हैं./ तुम बड़े वो हो!/

12. रिश्ते-नाते 
विविध स्तर : रक्त संबंध, विवाह संबंध, वंश संबंध
पति-पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन
संयुक्त परिवार
निर्भरता और दायित्व

13.  संबोधन : शिष्टाचार 
औपचारिक संबोधन : स्तर भेद : अपरिचय : स्त्री-पुरुष
आत्मीय संबोधन : कहाँ के हो, भैया?/ गोरखपुर का, अम्मी!/ मेरा बेटा जिंदा होता तो तुम्हारे जैसा ही हुआ होता, भैया! आज तुमने अम्मी कहा तो लगा मेरा बेटा ही पुकार रहा है. [ रामदरश मिश्र, दूसरा घर]
अति आत्मीय संबोधन : पगली/ जी- एजी/ हुज़ूर-सरकार/
जातिपरक संबोधन : मिश्रा जी, मौलवी साहब
व्यवसायपरक संबोधन : मास्टर जी, नेता जी,
प्रथम नाम/ उपनाम

14.  अभिवादन और आशीर्वाद 
चरण स्पर्श/ पालागीप्रणाम/ नमस्ते/ नमस्कार/ दंडवत प्रणाम/ करबद्ध प्रणाम / सलाम
हाथ मिलाना/ आलिंगन : प्यार की झप्पी
आशीर्वाद / सिर सूंघना/ पीठ थपथपाना / सिर छूना
जीते रहो/ चिरंजीवी भव/ पुत्रवती भव/ सौभाग्यवती भव/ विजयी भव/ खुश रहो/ शुभकामना......

 संदर्भ – 
गुर्रमकोंडा, नीरजा : 2015 : अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की व्यावहारिक परख : दिल्ली : वाणी

सिंह, दिलीप : 2007 : भाषा, साहित्य और संस्कृति शिक्षण: दिल्ली : वाणी

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

नेट की तैयारी : ज़रूरी बातें

उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद : द्विदिवसीय कार्यशाला - दूसरा दिन : ऋषभदेव शर्मा  # 25 फरवरी,2016

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-         अर्हता : एम ए – 55% - 28 वर्ष [जे आर एफ]
-         83 विषय – 88 केंद्र – 3 प्रश्नपत्र  - बहुविकल्पी वस्तुनिष्ठ
-         द्वितीय – 100 अंक – 50 x 2 – 1 ½ घंटे
-         तृतीय – १५० अंक – 75 x 2 – 2 ½ घंटे-         NO NEGATIVE MARKING.
 ++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++ 1.         3-4 महीने पहले से तैयारी करें.2.        तृतीय सत्र से ही....3.       नेट के निर्धारित पाठ्यक्रम को परीक्षक की दृष्टि से पढ़ें.4.       पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र/ अभ्यास मालाएं/ MOCK टेस्ट्स – अधिकाधिक ...5.       रटने/उगलने की अपेक्षा अवधारणाओं/ संकल्पनाओं को समझें.6.       पाठ्यक्रम को बहुविकल्पी वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के निर्माण की संभावना की दृष्टि से पढ़ें.7.       सतत अभ्यास द्वारा उत्तर देने की अपनी गति सुधारते रहें,8.       और...और...पढ़ें. मुख्य बिंदु नोट करें. सरलता से दोहराने का मानसिक अभ्यास करें. तथ्यों को वर्गीकृत करें.9.       विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करें.
10.    अपनी याददाश्त और एकाग्रता को बढाएं –                                 i.            दोहराएं  :  स्मृति – 24 घंटे में 18% और 1 महीने में 5% शेष.                                ii.            पढने और दोहराने की गति बढाएं.
                              iii.            थकने पर केवल 3 मिनट का विश्राम.
                              iv.            तथ्यों के अंतर्संबंध पहचानकर काल्पनिक चित्र/कथा बनाएं.                               v.            शृंखलाबद्ध करें [ लर्निंग सेक़ुएन्केस].                              vi.            आत्मनिरीक्षण करके अपनी आदतें बदलें.                            vii.            प्रतिदिन कम से कम 6 घंटे स्वाध्याय करें.                           viii.            निरंतरता बनाए रखें.                              ix.            सकारात्मक रहें.-           

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2016

हिंदी अनुसंधान की नई दिशाएँ


उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद :
कार्यशाला : 18 फरवरी, 2016 :
-----------------------------------------------------------------------------------------  ऋषभदेव शर्मा
1.        परंपरागत दिशाएँ
-    साहित्यकार
-    साहित्यिक कृति
-    साहित्येतिहास : काल
-    साहित्यिक प्रवृत्ति
-    विचारधारा
-    भाषाविज्ञान

2.       परंपरागत शोध-दृष्टियाँ
-    काव्यशास्त्रीय : भारतीय, पाश्चात्य
-    समाजशास्त्रीय
-    ऐतिहासिक
-    मार्क्सवादी
-    मनोविश्लेषणवादी
-    शैलीवैज्ञानिक
-    रूपवादी
-    सौन्दर्यशास्त्रीय
-    मिथकीय

3.       नई शोध-दृष्टियाँ
-    तुलनात्मक अध्ययन : आधुनिक परिप्रेक्ष्य
-    लोक अध्ययन
-    स्त्री विमर्श
-    दलित विमर्श
-    आदिवासी विमर्श
-    अल्पसंख्यक विमर्श
-    पर्यावरण विमर्श
-    वृद्धावस्था विमर्श
-    किन्नर विमर्श

4.       नए शोध-क्षेत्र
-    हिंदी शिक्षण
-    अनुवाद समीक्षा : अनुवाद तुलना
-    प्रतीकांतरण : कथा/ नाट्य
-    राजभाषा क्रियान्वयन
-    पत्रकारिता : सम्पादकीय से विज्ञापन तक
-    टेलिविजन : समाचार से धारावाहिक तक : वस्तु से वास्तु तक 
-    फिल्म : रूपांतरण से उत्तर आधुनिकता तक : पटकथा/ संवाद/ गीत/ प्रतिपाद्य
-    प्रवासी साहित्य : डायस्पोरा / बहिर्गमन / विस्थापन : सांस्कृतिक संदर्भ   
-    लोक साहित्य : संरक्षण/ विवेचन
-    लुप्तप्राय भाषाएँ